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फाइटोकेमिकल वैज्ञानिक सुदेश्वर साकी का दावा, जाति की दुर्घटना की हल्दी में कुकुमिन 7% से ज्यादा | हिमाचल में हल्दी की बुआई करने से किसान होंगे मालामाल

[Nurpur Hindi News ]

देहरा9 घंटे पहले

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हिमाचल में किसानों के लिए खुशखबरी है। अब कड़वाहट की वजह बनने लगी है। इसी वजह से देहरा से संबंध रखने वाले फाइटो केमिकल साइंटिस्ट सुदेश्वर साकी ने कांगड़ा से हल्दी के विभिन्न पहलुओं की मांग की तो द पोंग एनजीओ ने आगे आकर किसानों को सचेत करने का बीड़ा उठाया है।

फाइटो केमिकल साइंटिस्ट सुदेश्वर साकी का दावा है कि प्रगति की दुर्घटना की वजह से कुकुमिन 7% हो गया है। उन्होंने कहा कि देहरा, हरिपुर और कांगड़ा जिले के लोगों की प्रगति में लापरवाही आ रही है। प्रगति हल्दी के परीक्षण में इसकी कुकुमिन की मात्रा 6% से अधिक संभावित है, जो इसकी उच्च गुणवत्ता को पहचानती है।

इसके अलावा सामान्य हल्दी की फसल में 2 से 3 साल का समय लगता है, वही प्रगति हल्दी का यह बीज 6 महीने यानी 180 दिन में तैयार हो जाता है। इसके अलावा इसका नतीजा भी 20 से 30 गुना है जो कि बाकी हल्दी से कई गुना ज्यादा है।

किसान करने लगे हैं हल्दी की खेती
एनजीओ द्वारा सचेत करने के बाद पिछले एक साल में 400 किसानों को अपने साथ जोड़कर हल्दी की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। यदि आप 1 टन हल्दी के बीज की बिजाई करते हैं तो जिससे 6 महीने में 24 टन हल्दी की जड़ हो जाती है। जिसकी कीमत 24 लाख रुपए है।
हल्दी की खेती करने वाले किसानों को सबसे पहले अपने खेतों में इसकी खेती की पूरी जानकारी होनी चाहिए। हिमाचल में कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, बाजार और ऊना जाम का कब्जा हल्दी की खेती के लिए बहुत उपलब्ध है और इन सभी जगहों से किसान हल्दी की खेती कर रहे हैं।

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