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डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज भवन के निर्माण में देरी पर सीपीडब्ल्यूडी ने कार्रवाई की सिरमौर : सीपीडब्ल्यूडी ने शाहपुर कंस्ट्रक्शन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है

[Nurpur Hindi News ]

नहीं4 मिनट पहले

डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन के आवास।

हिमाचल के सिरमौर स्थित डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन की नींव बहुमंजिला इमारत का निर्माण कार्य पिछले 4 महीने से अधर में लटका हुआ है। इसके चलते निर्माण कार्य में देरी होने से मेडिकल कॉलेज का कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में CPWD ने अब कंपनी को शोकज नोटिस जारी किया है।

डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज के भवन का निर्माण 260 करोड़ रुपए में हो रहा है। इसकी जिम्मा शाहपुर जी पालोन जी कंस्ट्रक्शन (एसजेपीजेसी) कंपनी के पास है। अकादमिक ब्लॉक का निर्माण कार्य इसी वर्ष अगस्त 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके बाद भवन निर्माण का कार्य पूरा करने के लिए दिसंबर 2022 का समय निर्धारित किया गया था। मेडिकल कॉलेज का अकादमिक ब्लॉक 1685.3 वर्ग मीटर में बनेगा।

कंपनी को पहले ही पैसा जारी करने की बात कर रहा CPWD
इसी तरह 8688.86 वर्ग मीटर में अस्पताल भवन का निर्माण किया जाएगा। यह दोनों ब्लॉक तकनीक से तैयार किए जाएंगे। अब मेडिकल कॉलेज का निर्माण कर रही कंपनी और CPWD (सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट) ने पेश किया है। निर्माण कर रही है जहां कंपनी अतिरिक्त पैसा देने की मांग कर रही है। वहीं, CPWD कंपनी को पहले ही अतिरिक्त पैसा जारी करने की बात कह रही है।

कृष्णा लैब के आउट टेस्ट रिपोर्ट के लिए लगी आतंकियों की लाइन।

कृष्णा लैब के आउट टेस्ट रिपोर्ट के लिए लगी आतंकियों की लाइन।

टेस्ट रिपोर्ट के लिए घंटों इंतजार कर रहे मरीज
सीपीडब्ल्यूडी और निर्माण कंपनी के बीच चल रही अतिरिक्त सुविधाओं से नाहन मेडिकल कॉलेज की अजहर बहुमंजिला इमारत के अधर में लटकी हुई है। मेडिकल कॉलेज में रक्त की जांच से संबंधित परीक्षण से जुड़े कई कर्ज़दार हो रहे हैं। सुबह साढ़े 11 बजे सरकारी लैब बंद होने के बाद सरकारी अधिकृत निजी लैब में पहले परीक्षण फिर रिपोर्ट के लिए घंटों का इंतजार किया जा रहा है।

प्रदेश के उग्र में 154 तरह के परीक्षण मुफ्त ​​
समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के व्यस्त में करीब 154 तरह के टेस्ट फ्री उपलब्ध हैं। जिसके लिए सरकारी व सरकार द्वारा अधिकृत की गई लैब शामिल हैं। जिन निजी लोगों को सरकार द्वारा सरकारी स्तर पर संबद्ध के परीक्षण करने के लिए अधिकृत किया गया है। उसके लिए सरकारी अनुबंध के अनुसार अनुबंध भारी भरकम खर्च भी कर रहा है। ताकि अधिक बेहतर सुविधा मिल सके।

इसके बावजूद मजबूरी के अलावा कुछ हाथ नहीं लग रहा है। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. श्याम कौशिक से जब इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि इस बारे में जानकारी एमएस द्वारा दी जाएगी। उद्र, इस बारे में डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज के डिप्टी एमएस डॉक्टर सुनील कक्कड़ ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक ब्लॉक के निर्माण से जुड़े मामले प्रमुख कार्यालय के अधीन हैं।

कृष्णा लैब के कारण आ रही परेशानी के बारे में उन्होंने कहा कि यह मामला मेडिकल कॉलेज के नाम से है। जल्द से जल्द मिलने वाले लोगों को टेस्ट में आने से रोकने के लिए कदम उठाएंगे।

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